श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.287.49 
यत्र राजा च राज्ञश्च पुरुषा: प्रत्यनन्तरा:।
कुटुम्बिनामग्रभुजस्त्यजेत् तद् राष्ट्रमात्मवान्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जहाँ राजा और उसके बन्धुगण परिवार के सदस्यों से पहले भोजन करते हों, वहाँ बुद्धिमान पुरुष को उस राष्ट्र का त्याग कर देना चाहिए ॥ 49॥
 
A wise man must abandon a nation where the king and his close associates take their meals before the family members. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)