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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.287.45 
यत्र धर्ममनाशङ्काश्चरेयुर्वीतमत्सरा:।
भवेत् तत्र वसेच्चैव पुण्यशीलेषु साधुषु॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तथापि, ऐसे स्थान पर जहाँ लोग बिना किसी ईर्ष्या या संदेह के धर्म के मार्ग पर चलते हैं, वहाँ पवित्र और संत पुरुषों के पास रहना चाहिए।
 
However, in a place where people follow the path of Dharma without any jealousy or doubt, one must reside near pious and saintly persons. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)