श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.287.42 
शिष्योपाध्यायिकावृत्तिर्यत्र स्यात् सुसमाहिता।
यथावच्छास्त्रसम्पन्ना कस्तं देशं परित्यजेत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जहाँ गुरु और शिष्य का आचरण सुव्यवस्थित, शास्त्रानुसार और नियमानुसार हो, उस देश को कौन त्यागेगा? 42॥
 
Who will abandon that country where the behavior of Guru and disciple is orderly, as per the scriptures and as per the rules? 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)