Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.287.39: जैसे जल, अग्नि और चन्द्र किरणों के सम्पर्क में आने पर मनुष्य को क्रमशः ठण्डे, गर्म और सुखद स्पर्श का अनुभव होता है, वैसे ही पुण्यात्माओं और पापियों की संगति में हम पुण्य और पाप दोनों के स्पर्श का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं ॥39॥ | mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपामग्नेस्तथेन्दोश्च स्पर्शं वेदयते यथा।
तथा पश्यामहे स्पर्शमुभयो: पुण्यपापयो:॥ ३९॥
अनुवाद
जैसे जल, अग्नि और चन्द्र किरणों के सम्पर्क में आने पर मनुष्य को क्रमशः ठण्डे, गर्म और सुखद स्पर्श का अनुभव होता है, वैसे ही पुण्यात्माओं और पापियों की संगति में हम पुण्य और पाप दोनों के स्पर्श का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं ॥39॥
Just as when a human being comes in contact with water, fire and moon rays, he experiences cold, hot and pleasant touch respectively, in the same way we directly experience the touch of both virtue and sin in the company of virtuous souls and sinners. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥