Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.287.38: जो मनुष्य कर्म नहीं करता और जो कुछ मिलता है उसी पर निर्वाह करता है, वह भी यदि पुण्यात्माओं की संगति में रहता है तो उसे शुद्ध पुण्य की प्राप्ति होती है और यदि वह पापियों की संगति में रहता है तो उसे पाप का भागी होना पड़ता है ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य कर्म नहीं करता और जो कुछ मिलता है उसी पर निर्वाह करता है, वह भी यदि पुण्यात्माओं की संगति में रहता है तो उसे शुद्ध पुण्य की प्राप्ति होती है और यदि वह पापियों की संगति में रहता है तो उसे पाप का भागी होना पड़ता है ॥38॥
Even a man who does not undertake any action and subsists on whatever he gets, if he stays in the company of virtuous souls, attains pure virtue; and if he stays in the company of sinners, he incurs sin. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥