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mahabharat 12.287.37: कल्याण चाहने वाले मनुष्य को किसी भी स्थिति में वहाँ नहीं रहना चाहिए जहाँ चारों वर्णों के धर्म का उल्लंघन हो रहा हो ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.287.37 
चतुर्णां यत्र वर्णानां धर्मव्यतिकरो भवेत्।
न तत्र वासं कुर्वीत श्रेयोऽर्थी वै कथंचन॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कल्याण चाहने वाले मनुष्य को किसी भी स्थिति में वहाँ नहीं रहना चाहिए जहाँ चारों वर्णों के धर्म का उल्लंघन हो रहा हो ॥37॥
 
A person who desires welfare should not under any circumstances stay where the Dharma of the four Varnas is being violated. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)