श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.287.36 
ततो वासं परीक्षेत धर्मनित्येषु साधुषु।
मनुष्येषु वदान्येषु स्वधर्मनिरतेषु च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को सदैव धर्म में लगे हुए साधु-संतों और स्वधर्म में तत्पर उदार पुरुषों के समीप रहने की इच्छा करनी चाहिए ॥36॥
 
Man should always wish to live near sages and saints who are engaged in religion and generous people who are devoted to their own religion. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)