श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.287.32 
असदुच्चैरपि प्रोक्त: शब्द: समुपशाम्यति।
दीप्यते त्वेव लोकेषु शनैरपि सुभाषितम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई बुरी बात भी जोर से कही जाए तो वह नष्ट हो जाती है और संसार में उसका सम्मान नहीं होता; किन्तु यदि कोई अच्छी बात धीरे से कही जाए तो वह संसार में फैल जाती है - उसका सम्मान होता है और उसका प्रभाव बढ़ता है ॥ 32॥
 
Even if a bad thing is said loudly, it vanishes into nothingness and is not respected in the world; however, if a good thing is said softly, it spreads in the world – it is respected and its influence increases. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)