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mahabharat 12.287.31: मूर्ख व्यक्ति केवल अपनी प्रशंसा करके संसार में यश प्राप्त नहीं कर सकता। विद्वान व्यक्ति यदि गुफा में भी छिप जाए, तो भी वह सर्वत्र प्रसिद्ध हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.287.31 
न लोके दीप्यते मूर्ख: केवलात्मप्रशंसया।
अपि चापिहित: श्वभ्रे कृतविद्य: प्रकाशते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मूर्ख व्यक्ति केवल अपनी प्रशंसा करके संसार में यश प्राप्त नहीं कर सकता। विद्वान व्यक्ति यदि गुफा में भी छिप जाए, तो भी वह सर्वत्र प्रसिद्ध हो जाता है।
 
A foolish man cannot gain fame in the world merely by praising himself. Even if a learned man hides in a cave, he becomes famous everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)