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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
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श्लोक 30
श्लोक
12.287.30
एवमादीनि चान्यानि परित्यक्तानि मेधया।
ज्वलन्ति यशसा लोके यानि न व्याहरन्ति च॥ ३०॥
अनुवाद
इसी प्रकार इस संसार में बहुत सी ऐसी वस्तुएँ हैं जो बुद्धि से रहित हैं; वे अपनी प्रशंसा नहीं करतीं, अपितु अपनी कीर्ति से चमकती रहती हैं ॥30॥
Similarly, there are many things in this world that are devoid of wisdom; they do not praise themselves but keep shining with their fame. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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