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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
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श्लोक 3
श्लोक
12.287.3
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
गालवस्य च संवादं देवर्षेर्नारदस्य च॥ ३॥
अनुवाद
ज्ञानी लोग देवर्षि नारद और गालव ऋषि के संवाद का प्राचीन इतिहास का उदाहरण भी देते हैं ॥3॥
Knowledgeable people also cite the example of the ancient history of the dialogue between sage Devarshi Narada and sage Galav. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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