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mahabharat 12.287.29: फूलों की निर्मल और मनोहर सुगंध बिना कुछ कहे ही फैलती है। निर्मल सूर्य अपनी स्तुति किए बिना ही आकाश में चमकता है ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.287.29 
अब्रुवन् वाति सुरभिर्गन्ध: सुमनसां शुचि:।
तथैवाव्याहरन् भाति विमलो भानुरम्बरे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
फूलों की निर्मल और मनोहर सुगंध बिना कुछ कहे ही फैलती है। निर्मल सूर्य अपनी स्तुति किए बिना ही आकाश में चमकता है ॥29॥
 
The pure and delightful fragrance of flowers spreads without saying anything. The pure sun shines in the sky without praising itself. ॥29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)