श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.287.28 
अब्रुवन् कस्यचिन्निन्दामात्मपूजामवर्णयन्।
विपश्चिद् गुणसम्पन्न: प्राप्नोत्येव महद् यश:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जो विद्वान् पुरुष उत्तम गुणों से युक्त है, जो न तो दूसरों की निन्दा करता है और न अपनी प्रशंसा करता है, वह महान यश प्राप्त करता है।
 
But a learned man endowed with excellent qualities, who does not criticise others nor praise himself, achieves great fame. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)