श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.287.24 
नक्तंचर्यां दिवास्वप्नमालस्यं पैशुनं मदम्।
अतियोगमयोगं च श्रेयसोऽर्थी परित्यजेत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कल्याण चाहने वाले पुरुष को चाहिए कि रात्रि में घूमना, दिन में सोना, आलस्य, चुगली, मादक द्रव्यों का सेवन, अत्यधिक भोजन और मनोरंजन का सेवन तथा इनका सर्वथा त्याग कर दे - ॥24॥
 
A man who seeks welfare should give up roaming around at night, sleeping during the day, laziness, backbiting, consumption of intoxicants, excessive consumption of food and recreation and complete abandonment of them - ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)