श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.287.22 
धर्मेण वेदाध्ययनं वेदान्तानां तथैव च।
ज्ञानार्थानां च जिज्ञासा श्रेय एतदसंशयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वेद-वेदांगों का धार्मिक रीति से स्वाध्याय करना तथा उनके तत्त्वों को जानने की इच्छा को जीवित रखना निःसंदेह कल्याण का साधन है ॥22॥
 
Self-study of Vedas and Vedas in a religious manner and keeping the desire to know their principles alive is undoubtedly a means of welfare. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)