श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.287.2 
भीष्म उवाच
गुरुपूजा च सततं वृद्धानां पर्युपासनम्।
श्रवणं चैव शास्त्राणां कूटस्थं श्रेय उच्यते॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! सदैव गुरुजनों का पूजन, वृद्धजनों की सेवा और शास्त्रों का श्रवण - ये तीनों कल्याण के अचूक साधन कहे गए हैं॥2॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! Always worshiping the Gurus, serving the elders and listening to the scriptures – these three are said to be the infallible means of welfare. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)