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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
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श्लोक 18
श्लोक
12.287.18
मार्दवं सर्वभूतेषु व्यवहारेषु चार्जवम्।
वाक् चैव मधुरा प्रोक्ता श्रेय एतदसंशयम्॥ १८॥
अनुवाद
सब प्राणियों के साथ कोमलता से व्यवहार करना, आचरण में सरल रहना और मधुर वचन बोलना भी कल्याण का निःसंदेह मार्ग है ॥18॥
Treating all creatures with tenderness, being simple in conduct and speaking sweet words is also a doubt-free path to welfare. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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