श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.287.17 
निवृत्ति: कर्मण: पापात् सततं पुण्यशीलता।
सद्भिश्च समुदाचार: श्रेय एतदसंशयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पाप कर्मों से दूर रहना, सदा पुण्य कर्मों में लगे रहना, अच्छे लोगों की संगति में रहना तथा सही आचार संहिता का पालन करना, निस्संदेह कल्याण का मार्ग है।
 
To stay away from sinful acts, to constantly engage in pious deeds, and to live in the company of good people and follow the right code of conduct is the path to welfare without any doubt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)