Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.287.14: सामान्य मनुष्य इन आश्रमों का वास्तविक अर्थ बिना किसी संदेह के नहीं समझ पाते, किन्तु जो तत्त्व के ज्ञाता हैं, वे इन आश्रमों के परम सत्य को स्पष्ट रूप से समझ लेते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.287.14 
न यान्ति चैव ते सम्यगभिप्रेतमसंशयम्।
अन्येऽपश्यंस्तथा सम्यगाश्रमाणां परां गतिम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सामान्य मनुष्य इन आश्रमों का वास्तविक अर्थ बिना किसी संदेह के नहीं समझ पाते, किन्तु जो तत्त्व के ज्ञाता हैं, वे इन आश्रमों के परम सत्य को स्पष्ट रूप से समझ लेते हैं ॥14॥
 
Ordinary men are not able to understand the real meaning of these ashramas without any doubt, but those who are the knowers of truth, understand the ultimate truth of these ashramas clearly. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)