श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.287.11 
एतस्मात् कारणाच्छ्रेय: कलिलं प्रतिभाति मे।
ब्रवीतु भगवांस्तन्मे उपसन्नोऽस्म्यधीहि भो:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस कारण श्रेय (शुभ) स्वरूप मुझे संशययुक्त प्रतीत होता है। हे प्रभु! अब आप ही मुझे इसका उपदेश दीजिए। मैं आपकी शरण में आया हूँ, कृपया मेरे शिष्य को श्रेय (शुभ) मार्ग का उपदेश दीजिए।॥11॥
 
‘For this reason the nature of Shreya (good) seems to be full of doubts to me. O Lord! Now you only should teach me about it. I have come to your refuge, please teach me the path of Shreya (good) to my disciple.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)