Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.287.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जो मनुष्य शास्त्रों का सार नहीं जानता, जिसका मन सदैव संशय से भरा रहता है तथा जिसने दूसरों के कल्याण के लिए कोई निश्चित लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है, वह कैसे धन्य हो सकता है? कृपया मुझे यह बताइए।" | mahabharat अध्याय 12.287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जो मनुष्य शास्त्रों का सार नहीं जानता, जिसका मन सदैव संशय से भरा रहता है तथा जिसने दूसरों के कल्याण के लिए कोई निश्चित लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है, वह कैसे धन्य हो सकता है? कृपया मुझे यह बताइए।"
Yudhishthira asked, "Grandfather! How can a man who does not know the essence of the scriptures, whose mind is always full of doubts and who has not set a definite goal for the welfare of others, be blessed? Please tell me this."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥