Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.286.6: मैं कर्मों के आरम्भ को तथा उनके फल देने के समय को भी जानता हूँ। मैं इस संसार में प्राप्त होने वाले कर्मों के नाना प्रकार के फलों को भी जानता हूँ; इसीलिए मैं कभी दुःखी नहीं होता॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं कर्मों के आरम्भ को तथा उनके फल देने के समय को भी जानता हूँ। मैं इस संसार में प्राप्त होने वाले कर्मों के नाना प्रकार के फलों को भी जानता हूँ; इसीलिए मैं कभी दुःखी नहीं होता॥6॥
I know the beginning of actions as well as the time when they will bear fruit. I also know the various kinds of results of actions that are obtained in this world; that is why I never feel sad. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥