Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.286.20: जैसे अमृत पीने वाले को मृत्यु का भय नहीं रहता, वैसे ही मुझे भी इस लोक या परलोक में मृत्यु, पाप, लोभ या किसी भी वस्तु का भय नहीं है। ॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च मृत्योर्न चाधर्मान्न लोभान्न कुतश्चन।
पीतामृतस्येवात्यन्तमिह वामुत्र वा भयम्॥ २०॥
अनुवाद
जैसे अमृत पीने वाले को मृत्यु का भय नहीं रहता, वैसे ही मुझे भी इस लोक या परलोक में मृत्यु, पाप, लोभ या किसी भी वस्तु का भय नहीं है। ॥20॥
Just as a person who drinks nectar has no fear of death, similarly I have no fear of death, sin, greed or anything else in this world or the next. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥