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mahabharat 12.286.2: भीष्मजी बोले - भरतनन्दन! इस विषय में विद्वान पुरुष देवर्षि नारद और समंग के संवाद रूपी प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.286.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
नारदस्य च संवादं समङ्गस्य च भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - भरतनन्दन! इस विषय में विद्वान पुरुष देवर्षि नारद और समंग के संवाद रूपी प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥2॥
 
Bhishmaji said – Bharatnandan! In this matter, learned men give the example of ancient history in the form of dialogue between Devarshi Narad and Samang. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)