Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.285.17-18: नेत्र आदि इन्द्रियाँ देखने आदि कार्यों के लिए हैं। मन संशय करता है और बुद्धि विषय का सही निर्णय करने के लिए है। क्षेत्रज्ञ (आत्मा) को साक्षी कहा गया है। भरतनंदन! सत्व, रज, तम, काल और कर्म - ये पाँच गुण बुद्धि को बार-बार भिन्न-भिन्न विषयों की ओर ले जाते हैं। बुद्धि मन सहित सभी इन्द्रियों को नियंत्रित करती है। यदि बुद्धि न हो तो ये गुण - इन्द्रियाँ आदि कोई कार्य कैसे कर सकेंगी।   |   mahabharat अध्याय 12.285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  12.285.17-18 
चक्षुरालोचनायैव संशयं कुरुते मन:।
बुद्धिरध्यवसानाय साक्षी क्षेत्रज्ञ उच्यते।
तम: सत्त्वं रजश्चेति काल: कर्म च भारत॥ १७॥
गुणैर्नेनीयते बुद्धिर्बुद्धिरेवेन्द्रियाणि च।
मन:षष्ठानि सर्वाणि बुद्धॺभावे कुतो गुणा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
नेत्र आदि इन्द्रियाँ देखने आदि कार्यों के लिए हैं। मन संशय करता है और बुद्धि विषय का सही निर्णय करने के लिए है। क्षेत्रज्ञ (आत्मा) को साक्षी कहा गया है। भरतनंदन! सत्व, रज, तम, काल और कर्म - ये पाँच गुण बुद्धि को बार-बार भिन्न-भिन्न विषयों की ओर ले जाते हैं। बुद्धि मन सहित सभी इन्द्रियों को नियंत्रित करती है। यदि बुद्धि न हो तो ये गुण - इन्द्रियाँ आदि कोई कार्य कैसे कर सकेंगी।
 
The senses like eyes etc. are for functions like seeing etc. The mind doubts and the intellect is for deciding the subject correctly. The knower of the field (soul) is said to be the witness. Bharatanandan! The intellect is repeatedly taken towards different subjects by these five qualities - Sattva, Raja, Tam, Kaal and Karma. The intellect controls all the senses including the mind. If there is no intellect then how can these qualities - senses etc. do any work.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)