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mahabharat 12.285.13: भरतनन्दन! भगवान ने इन प्राणियों के शरीर में सत्व, रज, तम, काल, कर्म, बुद्धि और मन सहित पाँच इन्द्रियों की कल्पना की है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.285.13 
सत्त्वं रजस्तम: काल: कर्म बुद्धिश्च भारत।
मन:षष्ठानि चैतेषु ईश्वर: समकल्पयत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! भगवान ने इन प्राणियों के शरीर में सत्व, रज, तम, काल, कर्म, बुद्धि और मन सहित पाँच इन्द्रियों की कल्पना की है॥13॥
 
Bharatnandan! God has imagined the five sense organs including Sattva, Raja, Tama, Kaal, Karma, Buddhi and Mana in the bodies of these creatures. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)