अघोरघोररूपाय घोरघोरतराय च।
नम: शिवाय शान्ताय नम: शान्ततमाय च ॥ ९६॥
अनुवाद
जो भयंकर, भयानक और भयंकर से भी भयंकर रूप वाले हैं तथा जो शिवस्वरूप हैं, शान्त और परम शान्त स्वरूप हैं, उन भगवान शंकर को मैं बारंबार नमस्कार करता हूँ॥96॥
I repeatedly salute Lord Shankar, who is fierce, terrible and even more fierce than the fiercest form, and who is the form of Shiva, who is peaceful and the most peaceful. ॥96॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥