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mahabharat 12.284.93: आप वृष (वर्षा करने वाले), वृष्य (धर्म की वृद्धि करने वाले), गोवृष (नंदी) और वृष (धर्म) आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। कटंकट (सदैव गतिशील), दण्ड (शासक) और पचपच (सभी तत्त्वों को पचाने वाला काल) भी आपके नाम हैं। आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  12.284.93 
नमो वृषाय वृष्याय गोवृषाय वृषाय च।
कटंकटाय दण्डाय नम: पचपचाय च॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
आप वृष (वर्षा करने वाले), वृष्य (धर्म की वृद्धि करने वाले), गोवृष (नंदी) और वृष (धर्म) आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। कटंकट (सदैव गतिशील), दण्ड (शासक) और पचपच (सभी तत्त्वों को पचाने वाला काल) भी आपके नाम हैं। आपको नमस्कार है।
 
You are famous by the names Vrish (rain-bringer), Vrishya (one who increases religion), Govrish (Nandi) and Vrish (religion) etc. Katankat (always moving), Danda (ruler) and Pachpach (time which digests all elements) are also your names. Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)