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mahabharat 12.284.90: हे प्रभु! आपकी हँसी भयंकर ध्वनि वाले ढोल के समान प्रतीत होती है। आप घोर व्रत का पालन करने वाले हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। आप दस भुजाओं से सुशोभित हैं और भयंकर रूप वाले हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  12.284.90 
भीमदुन्दुभिहासाय भीमव्रतधराय च।
उग्राय च नमो नित्यं नमोऽस्तु दशबाहवे॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आपकी हँसी भयंकर ध्वनि वाले ढोल के समान प्रतीत होती है। आप घोर व्रत का पालन करने वाले हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ। आप दस भुजाओं से सुशोभित हैं और भयंकर रूप वाले हैं।
 
Lord! Your laughter seems like a terrifying sounding drum. You are the one who observes a fierce vow. I salute you again and again, you are adorned with ten arms and have a fierce form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)