श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  12.284.9-10h 
एते चान्ये च बहवो भूतग्रामाश्चतुर्विधा:॥ ९॥
जरायुजाण्डजाश्चैव सहसा स्वेदजोद्भिजै:।
 
 
अनुवाद
ये तथा अन्य बहुत से चार प्रकार के प्राणी - सजीव, अण्डज, स्वेदज और वनस्पतिज - वहाँ उपस्थित थे ॥9 1/2॥
 
These and many other animals of the four types - viviparous, oviparous, sweating and plant-born, were present there. ॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)