Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.85: आप ही सत्ता और मंत्र हैं। आपको नमस्कार है। आपकी ध्वजा और पताका का रंग श्वेत है। आपको नमस्कार है। आप नभ (अपनी नाभि में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण करने वाले), नाभ्य (संसारचक्र की नाभि) और कट-कट (आवरणों के आवरण) हैं। आपको नमस्कार है। 85। | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप ही सत्ता और मंत्र हैं। आपको नमस्कार है। आपकी ध्वजा और पताका का रंग श्वेत है। आपको नमस्कार है। आप नभ (अपनी नाभि में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण करने वाले), नाभ्य (संसारचक्र की नाभि) और कट-कट (आवरणों के आवरण) हैं। आपको नमस्कार है। 85।
You are the existence and the mantra. Salutations to you. The colour of your flag and banner is white. Salutations to you. You are Nabha (the one who holds the entire universe in his navel), Nabhya (the navel of the world-wheel) and Kat-Kat (the covering of the coverings). Salutations to you. 85.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥