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mahabharat 12.284.78: आपके तीन जटाएँ और तीन सिर हैं। आप हाथ में एक महान त्रिशूल धारण करते हैं। आप त्र्यम्बक हैं, त्रिनेत्रधारी हैं और त्रिपुरासुर का संहार करने वाले हैं। आपको नमस्कार है। 78।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  12.284.78 
त्रिजटाय त्रिशीर्षाय त्रिशूलवरपाणिने।
त्र्यम्बकाय त्रिनेत्राय त्रिपुरघ्नाय वै नम:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
आपके तीन जटाएँ और तीन सिर हैं। आप हाथ में एक महान त्रिशूल धारण करते हैं। आप त्र्यम्बक हैं, त्रिनेत्रधारी हैं और त्रिपुरासुर का संहार करने वाले हैं। आपको नमस्कार है। 78।
 
You have three matted locks and three heads. You hold a great trident in your hand. You are Tryambaka, three-eyed and the destroyer of Tripurasur. Salutations to you. 78.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)