vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा
»
श्लोक 76
श्लोक
12.284.76
भगवान् कारणं कार्यं क्रिया करणमेव च।
असतश्च सतश्चैव तथैव प्रभवाप्ययौ॥ ७६॥
अनुवाद
आप ही कारण, कार्य, क्रिया (प्रयास) और निमित्त हैं। आप ही सत् और असत् की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं ॥ 76॥
You are the cause, the effect, the action (effort) and the instrument. You are the place of origin and destruction of the real and the unreal. ॥ 76॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×