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mahabharat 12.284.76: आप ही कारण, कार्य, क्रिया (प्रयास) और निमित्त हैं। आप ही सत् और असत् की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं ॥ 76॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.284.76 
भगवान् कारणं कार्यं क्रिया करणमेव च।
असतश्च सतश्चैव तथैव प्रभवाप्ययौ॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
आप ही कारण, कार्य, क्रिया (प्रयास) और निमित्त हैं। आप ही सत् और असत् की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं ॥ 76॥
 
You are the cause, the effect, the action (effort) and the instrument. You are the place of origin and destruction of the real and the unreal. ॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)