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mahabharat 12.284.75: मैं आपके शरीर में सोम, अग्नि, वरुण, सूर्य, विष्णु, ब्रह्मा और बृहस्पति को भी देख रहा हूँ ॥75॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  12.284.75 
भवच्छरीरे पश्यामि सोममग्निं जलेश्वरम्।
आदित्यमथ वै विष्णुं ब्रह्माणं च बृहस्पतिम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
मैं आपके शरीर में सोम, अग्नि, वरुण, सूर्य, विष्णु, ब्रह्मा और बृहस्पति को भी देख रहा हूँ ॥75॥
 
I am also seeing Soma, Agni, Varun, Surya, Vishnu, Brahma and Jupiter in your body. 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)