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mahabharat 12.284.71-72h: आपके कान सर्वत्र हैं। आप जगत की प्रत्येक वस्तु में व्याप्त हैं। शंकुकर्ण, महाकर्ण, कुंभकर्ण, अर्णवलय, गजेंद्रकर्ण, गोकर्ण और पणिकर्ण- ये सात सहयोगी आपके स्वरूप हैं। इन सभी रूपों में आपको नमस्कार है। 71 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 71-72h
 
 
श्लोक  12.284.71-72h 
सर्वत:श्रुतिमँल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठसि।
शंकुकर्ण महाकर्ण कुम्भकर्णार्णवालय॥ ७१॥
गजेन्द्रकर्ण गोकर्ण पाणिकर्ण नमोऽस्तु ते।
 
 
अनुवाद
आपके कान सर्वत्र हैं। आप जगत की प्रत्येक वस्तु में व्याप्त हैं। शंकुकर्ण, महाकर्ण, कुंभकर्ण, अर्णवलय, गजेंद्रकर्ण, गोकर्ण और पणिकर्ण- ये सात सहयोगी आपके स्वरूप हैं। इन सभी रूपों में आपको नमस्कार है। 71 1/2।
 
Your ears are everywhere. You are situated permeating everything in the world. Shankukarna, Mahakarna, Kumbhakarna, Arnavalaya, Gajendrakarna, Gokarna and Panikarn-these seven associates are your forms. Salutations to you in all these forms. 71 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)