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mahabharat 12.284.7-8h: आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य और मरुद्गण- ये सभी इन्द्र के साथ यज्ञ में भाग लेने के लिए वहाँ आये थे ॥7 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  12.284.7-8h 
आदित्या वसवो रुद्रा: साध्या: सह मरुद्‍गणै:॥ ७॥
इन्द्रेण सहिता: सर्वे आगता यज्ञभागिन:।
 
 
अनुवाद
आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य और मरुद्गण- ये सभी इन्द्र के साथ यज्ञ में भाग लेने के लिए वहाँ आये थे ॥7 1/2॥
 
Aditya, Vasu, Rudra, Sadhya and Marudgan—all of them had come there to participate in the yagya along with Indra. 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)