श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.284.69 
नमस्ते देवदेवेश देवारिबलसूदन।
देवेन्द्रबलविष्टम्भ देवदानवपूजित॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
(दक्ष ने कहा) - हे देवदेवेश्वर! आपको नमस्कार है। आप देवव्यारी दैत्यों की सेना का संहार करने वाले तथा देवराज इन्द्र की शक्ति को स्तब्ध करने वाले हैं। देवता और दैत्य - सभी ने आपकी पूजा की है। 69.
 
(Daksha said) - O Devdeveshwar! Salutations to you. You are the destroyer of the army of Devavyari demons and also the one who has stunned the power of Devraj Indra. Gods and demons - all have worshipped you. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)