श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.284.65 
तथास्त्वित्याह भगवान् भगनेत्रहरो हर:।
धर्माध्यक्षो विरूपाक्षस्त्र्यक्षो देव: प्रजापति:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
तब धर्म के अधिष्ठाता, प्रजापालक, तीन नेत्रों वाले, देवियों के स्वामी विरुपाक्ष भगवान हरणे ने ‘तथास्तु’ कहकर दक्ष को इच्छित वर दिया ॥65॥
 
Then Lord Harane, the head of the religion, protector of the people, Virupaksha, bearer of the three eyes, Lord of the Goddesses, said 'Tathaastu' and gave the desired boon to Daksha. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)