श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  12.284.6-7h 
देवदानवगन्धर्वा: पिशाचोरगराक्षसा:।
हाहाहूहूश्च गन्धर्वौ तुम्बुरुर्नारदस्तथा॥ ६॥
विश्वावसुर्विश्वसेनो गन्धर्वाप्सरसस्तथा।
 
 
अनुवाद
देवता, दानव, गंधर्व, पिशाच, नाग, राक्षस, हाहा और हुहु नामक गंधर्व, तुम्बुरु, नारद, विश्वावसु, विश्वसेन तथा अन्य गंधर्व और अप्सराएँ वहाँ उपस्थित थे। 6 1/2॥
 
Gods, demons, Gandharvas, vampires, snakes, demons, Gandharvas named Haha and Huhu, Tumburu, Narada, Vishwavasu, Vishvasena and other Gandharvas and Apsaras were present there. 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)