Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.51-52h: वीरभद्र बोले - ब्रह्मन्! मैं न तो रुद्र हूँ, न देवी हूँ और न ही मैं यहाँ भोजन करने आया हूँ। यह जानकर कि तुम्हारा यज्ञ देवी पार्वती के क्रोध का कारण बना है, परमात्मा भगवान शिव क्रोधित हो गए हैं। | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीरभद्र उवाच
नाहं रुद्रो न वा देवी नैव भोक्तुमिहागत:॥ ५१॥
देव्या मन्युकृतं मत्वा क्रुद्ध: सर्वात्मक: प्रभु:।
अनुवाद
वीरभद्र बोले - ब्रह्मन्! मैं न तो रुद्र हूँ, न देवी हूँ और न ही मैं यहाँ भोजन करने आया हूँ। यह जानकर कि तुम्हारा यज्ञ देवी पार्वती के क्रोध का कारण बना है, परमात्मा भगवान शिव क्रोधित हो गए हैं।
Veerbhadra said - Brahman! I am neither Rudra nor Devi and I have not come here to eat food. Knowing that your yagya has become the reason for Goddess Parvati's anger, the Supreme Soul Lord Shiva has become furious. 51 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥