Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.39-40: उस समय अग्नि प्रज्वलित नहीं हुई, सूर्य का प्रकाश मंद पड़ गया; ग्रह, तारे और चंद्रमा भी मंद पड़ गए। इस प्रकार सर्वत्र अंधकार छा गया। देवता, ऋषि और मनुष्य - सभी छिप गए - कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। दक्ष द्वारा अपमानित रुद्रों ने यज्ञवेदी के चारों ओर अग्नि प्रज्वलित करना आरम्भ कर दिया। 39-40 | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्नयो नैव दीप्यन्ते नैव दीप्यति भास्कर:।
ग्रहा नैव प्रकाशन्ते नक्षत्राणि न चन्द्रमा:॥ ३९॥
ऋषयो न प्रकाशन्ते न देवा न च मानुषा:।
एवं तु तिमिरीभूते निर्दहन्त्यपमानिता:॥ ४०॥
अनुवाद
उस समय अग्नि प्रज्वलित नहीं हुई, सूर्य का प्रकाश मंद पड़ गया; ग्रह, तारे और चंद्रमा भी मंद पड़ गए। इस प्रकार सर्वत्र अंधकार छा गया। देवता, ऋषि और मनुष्य - सभी छिप गए - कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। दक्ष द्वारा अपमानित रुद्रों ने यज्ञवेदी के चारों ओर अग्नि प्रज्वलित करना आरम्भ कर दिया। 39-40
At that time the fire did not burn, the light of the sun faded; the planets, stars and the moon also became dim. Thus darkness prevailed everywhere. Gods, sages and humans – all hid – no one was visible. The Rudras, insulted by Daksha, started setting fire all around the sacrificial altar. 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥