Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.37-38: यज्ञ में उपस्थित सभी देवता उस भयानक ध्वनि से व्याकुल हो गए। पर्वत टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गए। धरती काँपने लगी, आँधी चलने लगी और समुद्र में खलबली मच गई। | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञ में उपस्थित सभी देवता उस भयानक ध्वनि से व्याकुल हो गए। पर्वत टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गए। धरती काँपने लगी, आँधी चलने लगी और समुद्र में खलबली मच गई।
All the gods present at the sacrifice were perturbed by the terrifying noise. The mountains broke into pieces and scattered. The earth began to shake, a storm began to blow and the sea was raging.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥