इत्युक्त्वा भगवान् पत्नीमुमां प्राणैरपि प्रियाम्।
सोऽसृजद् भगवान् वक्त्राद् भूतं घोरं प्रहर्षणम्॥ २९॥
अनुवाद
भगवान महेश्वर ने अपनी प्राणों से भी अधिक प्रिय पत्नी उमा से ये वचन कहकर अपने मुख से एक अद्भुत एवं भयानक प्राणी उत्पन्न किया, जिससे उमा का आनन्द बढ़ गया।
Having said these words to his wife Uma, who was dearer to him than his life, Lord Maheshwara produced from his mouth a wonderful and fearsome creature, which increased her joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥