श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.284.26 
मामध्वरे शंसितार: स्तुवन्ति
रथन्तरं सामगाश्चोपगान्ति।
मां ब्राह्मणा ब्रह्मविदो यजन्ते
ममाध्वर्यव: कल्पयन्ते च भागम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यज्ञकर्ता मेरी स्तुति करते हैं। साम-गीत गाने वाले ब्राह्मण रथन्तर साम के रूप में मेरी महिमा का गान करते हैं। वेदों को जानने वाले ब्राह्मण मेरी पूजा करते हैं और पुरोहित यज्ञ में अपना भाग मुझे अर्पित करते हैं।॥26॥
 
‘The performers of the yajna praise me. The Brahmins who sing the Sama-song sing my glories in the form of Rathantar Sama. The Brahmins who know the Vedas worship me and the priests offer their share to me in the yajna.’॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)