एवं ब्रुवाणां भगवान् स पत्नीं
प्रहृष्टरूप: क्षुभितामुवाच।
न वेत्सि मां देवि कृशोदराङ्गि
किं नाम युक्तं वचनं मखेशे॥ २४॥
अनुवाद
अपनी पत्नी को इस प्रकार क्रोधित स्वर में बोलते सुनकर भगवान शंकर हर्ष से भर गए और बोले, 'देवि! हे कृष्ण! तुम मुझे नहीं जानतीं। मैं समस्त यज्ञों का ईश्वर हूँ। तुम यह भी नहीं जानतीं कि मेरे विषय में किस प्रकार के वचन बोलने चाहिए॥ 24॥
Hearing his wife speaking in such an angry tone, Lord Shankar was filled with joy and said, 'Devi! O Krishna! You do not know me. I am the God of all sacrifices. You do not even know what kind of words should be spoken about me.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥