Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.23: (उधर कैलाश पर्वत पर) देवी पार्वती (अत्यंत दुःखी होकर) कह रही थीं कि 'मैं ऐसा कौन-सा व्रत, दान या तप करूँ, जिसके बल से आज मेरे पति अचिन्त्य भगवान शंकर यज्ञ का आधा या एक तिहाई भाग अवश्य प्राप्त कर लें?'॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देव्युवाच
किं नाम दानं नियमं तपो वा
कुर्यामहं येन पतिर्ममाद्य।
लभेत भागं भगवानचिन्त्यो
ह्यर्धं तथा भागमथो तृतीयम्॥ २३॥
अनुवाद
(उधर कैलाश पर्वत पर) देवी पार्वती (अत्यंत दुःखी होकर) कह रही थीं कि 'मैं ऐसा कौन-सा व्रत, दान या तप करूँ, जिसके बल से आज मेरे पति अचिन्त्य भगवान शंकर यज्ञ का आधा या एक तिहाई भाग अवश्य प्राप्त कर लें?'॥ 23॥
(On the other side, on Mount Kailash) Goddess Parvati (in a very sad mood) was saying, 'Which fast, charity or penance should I perform, by the power of which today my husband, the inconceivable Lord Shankar, may certainly receive half or one-third of the sacrifice?'॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥