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mahabharat 12.284.199: जो मनुष्य इस सम्पूर्ण स्तोत्र को एकाग्रचित्त होकर सुनता या पढ़ता है, उसके सभी कार्य सदैव सिद्ध होते हैं ॥199॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  12.284.199 
शृणुयाद् य: स्तवं कृत्स्नं कीर्तयेद् वा समाहित:।
तस्य सर्वाणि कर्माणि सिद्धिं गच्छन्त्यभीक्ष्णश:॥ १९९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस सम्पूर्ण स्तोत्र को एकाग्रचित्त होकर सुनता या पढ़ता है, उसके सभी कार्य सदैव सिद्ध होते हैं ॥199॥
 
One who listens to or reads this entire hymn with full concentration, all his tasks are always accomplished. ॥ 199॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)