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mahabharat 12.284.197: जिस घर में यह स्तोत्र पढ़ा जाता है, वहाँ राक्षस, भूत और विनायक कभी उपद्रव नहीं करते ॥197॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 197
 
 
श्लोक  12.284.197 
न राक्षसा: पिशाचा वा न भूता न विनायका:।
विघ्नं कुर्युर्गृहे तस्य यत्रायं पठॺते स्तव:॥ १९७॥
 
 
अनुवाद
जिस घर में यह स्तोत्र पढ़ा जाता है, वहाँ राक्षस, भूत और विनायक कभी उपद्रव नहीं करते ॥197॥
 
In the house where this hymn is recited, demons, ghosts and Vinayaka never cause any disturbance. ॥ 197॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)