श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  12.284.194 
यशोराज्यसुखैश्वर्यकामार्थधनकांक्षिभि:।
श्रोतव्यो भक्तिमास्थाय विद्याकामैश्च यत्नत:॥ १९४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य यश, राज्य, सुख, ऐश्वर्य, काम, धन, सम्पत्ति और विद्या चाहते हैं, उन्हें भक्तिपूर्वक इस स्तोत्र का श्रवण करना चाहिए।
 
Those who desire fame, kingdom, happiness, opulence, work, wealth, wealth and knowledge should listen to this stotra diligently with the help of devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)