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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा
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श्लोक 192
श्लोक
12.284.192
दक्षप्रोक्तं स्तवमिमं कीर्तयेद् य: शृणोति वा।
नाशुभं प्राप्नुयात् किंचिद् दीर्घमायुरवाप्नुयात्॥ १९२॥
अनुवाद
जो मनुष्य दक्ष द्वारा कहे गए इस स्तोत्र का पाठ करेगा या सुनेगा, उसे कभी कोई विपत्ति नहीं आएगी, वह दीर्घायु प्राप्त करेगा ॥192॥
The person who will recite or listen to this hymn recited by Daksha will not face any misfortune. He will attain a long life. ॥192॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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